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Sundar Kand · रामचरितमानस · हनुमान केंद्रित कांड
हनुमान जी के सागर-लंघन, सीता-दर्शन और लंका-प्रसंग का पावन कांड। पूर्ण मूल पाठ गीताप्रेस संस्करण से मिलान के साथ खंड-खंड जोड़ा जा रहा है — नीचे आरंभिक श्रवण-नमूना।
जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥
जामवंत के सुंदर वचन सुन हनुमान के हृदय में अत्यंत आनंद हुआ।
तब लगि मोहि आनि सुधि कहि। कौतुक कहि समुझाए उर लहि॥
तब तक अपनी सुधि दिलाई और कौतुक कहकर हृदय समझाया।
सुनु हनुमंत बल बुद्धि निधाना। राम काज करिबे को आना॥
हे हनुमान, बल-बुद्धि के निधान, राम काज के लिए आए हो।
राम काज लगि तव अवतारा। सुनत भए मगन छमा अपारा॥
राम काज के लिए तुम्हारा अवतार — सुनकर अपार क्षमा में मग्न हुए।
जयति पवन कुमार बलवाना। राम भगत अति सुंदर ज्ञाना॥
पवनकुमार बलवान की जय — रामभक्त, सुंदर ज्ञान संपन्न।